|| श्री कलटिया दादा टूटियां बैठ वाला ।।
|| श्री कलटिया दादा. ।।
टूटियां बैठ वाला आज वेला पधारजो,
मगरा वाला राठौड़ दाता लाज मारी राखजो।
राठौड़ वंश में जन्म लीनो-क्षत्रीकुल उज्जवल कियो ।
ब्रह्मचर्य से व्रत पालता-साधना साध्यो रोग रो
दुष्टा रा जद दमन किधा, दुःखड़ा हारन पधार जो ।
|| श्री कलटिया दादा. ।।
हीरा पन्ना नव रत्ना , गले कान मुद्रा ।।
धर्म धारक प्रति पालक, लाज मारी राख जो
II श्री कलटिया दादा. ।।
लिलुडे असवारी कुंवर, खड़ग लीधी हाथ में ।।
खड़ग धारक दुःख हारक, रक्षा करवा पधार जो
खड़ग धारक आसरो, महाशत्रु म्हारो कई करे।
II श्री कलटिया दादा. ।।
शिव शक्ति रे परम लाडला , हेलो मारो सुन जो
गुरू भैरव सग योग साध्या थे, योग साध्या ज्ञान रा ।।
टूटियां बैठ ठाकुरजी न्यौता दिधा, अठे पधार जो पामना ।
खड़ग धारक आसरो, महाशत्रु म्हारो कई करे।
II श्री कलटिया दादा. ।।
आण लेवा पाचा चालिया , मारे आंगन पधार जो ।
आण चोडिया पाछा फरीया, रण सन्देश मलीया रन ने ।
।। श्री खडक धारक आसरे ।।
II श्री कलटिया दादा. ।।
लाका गाटी ढोल बाजता , रण संदेशों आया आगने
ठाकुर जी तो रण चढ़िया, रण जीती आव जो
II श्री कलटिया दादा. ।।
कृष्णासिंह जी तो गैलो रोकीया, अरे मु तो आया पामणा
थे कटे चाल्या में भी चाला संग थे,
धर्म लुटिया धेनु लूटी धरती लूटी आइने
II श्री कलटिया दादा. ।।
पाला भील री कीधी चढाई , आंख तिकी काड जो ।
संग चालिया रण चढ़िया , रण जीत पधार जो
दाहे हनुमान बाय भैरव ,महाशत्रु म्हारो कई करे
|| श्री कलटिया दादा. ।।
धर्म लुटिया धेनु लूटी धरती लूटी आइने
वागढ रा थे संकट मेटो, लाज राखो आन ने।।
लिलुडे असवारी कुंवर , वारी वेगा पधार्जो ।
खड़ग धारक आसरो, महाशत्रु म्हारो कई करे।
|| श्री कलटिया दादा. ।।
गढ़ जीतु पाछा आवजु , मारे आगण पधारजो ।।
दुष्टा रा तो दमन किधा मानसिंह जी लिधा सग में ।
रूढ़ चलिए मुड़ लेने, वचन टेक राख जो
|| श्री कलटिया दादा. ।।
शिश कटता धडसु लड़ियो, कटलिया रूप सुहावणे ।
गुरु भैरव नो आसरो,महाशत्रु म्हारो कई करे।
।। खड़क धारक ।।
सत चढ़ता सती पधारया, कुँवर लीधा अंग में
चन्दन री चिता पर चढ़ीया, स्वर्ग चाल्या संग में।
धर्म राख्यो- धेनु राखी, धरती राखी मान में।
धर्म धारक, प्रीतिपालक वा रे वेलो पधारजो ।।
।। मगरा वाला राठौड़ दाता।।
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